अनार के पौधों में जैवरासायनिक एवं शारीरिक क्रियाओं को सुचारू रूप से चलाने में सभी याने मुख्य, दुय्यम और सुक्ष्म पोषकतत्वो की महत्वपूर्ण भूमिका हैं। ये सभी मिलकर एक ऐसा सहक्रियात्मक प्रभाव पैदा करते हैं, जिससे पौधे में पत्तियों का फुटाव एकसमान होकर चौकी अच्छे से सैट होकर नई कलिया निकलने में मदद मिलती है।
समुद्री शैवाल अर्क (Seaweed Extract) / वीगर बायो 20:
समुद्री शैवाल अर्क को केवल उर्वरक न मानकर एक जैविक उत्तेजक (Bio-stimulant) माना जाता है। इसकी भूमिका प्रत्यक्ष पोषण देने से अधिक, पौधे की आंतरिक प्रक्रियाओं को उत्तेजित करने की होती है। इसके अलावा मौसम में हो रहे बदलाव के प्रती भी पौधे को आतंरिक सहाय्यता प्रदान करता है।
- हार्मोनल संतुलन और वृद्धि: इसमें प्राकृतिक रूप से पाए जानेवाले पादप हार्मोन जैसे औक्सिन (Auxin), साईटोकाइनिन (Cytokinin) और जिबरेलिन (Gibberellins) पौधे की कोशिका विभाजन, जड़ वृद्धि (विशेषकर सफेद जड़ों का विकास) और शूट विकास को नियंत्रित करते हैं। यह सीधे तौर पर पौधे की शारीरिक संरचना को मजबूत बनाता है ।
- पोषकतत्व ग्रहण क्षमता में वृद्धि: यह जड़ों के विकास को बढ़ावा देकर और मिट्टी में सूक्ष्मजीवी गतिविधि को बढ़ाकर पौधे की मिट्टी से मुख्य, दुय्यम और सूक्ष्मपोषकतत्वों को अवशोषित करने की क्षमता को बढ़ाता है।
जिंक (Zinc):
जिंक एक अत्यंत आवश्यक सूक्ष्मपोषकतत्व है, जो पौधे के भीतर होने वाली अनेक जैवरासायनिक क्रियाओं के लिए अनिवार्य है।
- एंजाईम सक्रियक: यह कई महत्वपूर्ण एंजाईमों के लिए एक सह-कारक (Cofactor) का काम करता है। ये एंजाइम प्रोटीन संश्लेषण, ऊर्जा उत्पादन और कार्बोहाइड्रेट चयापचय (Metabolism) जैसी मूलभूत प्रक्रियाओं को नियंत्रित करते हैं।
- हार्मोन निर्माण: जिंक, औक्सिन (Auxin) हार्मोन के संश्लेषण के लिए आवश्यक है। औक्सिन ही कोशिका विभाजन, वृद्धि और नई जड़ों व फलों के निर्माण को प्रेरित करता है। जिंक की कमी से औक्सिन का स्तर गिर जाता है, जिससे पौधे की वृद्धि में रुकावट आती है।
- प्रजनन स्वास्थ्य: यह फूलों के निर्माण, पराग नलिका (Pollen tube) के विकास और बीज निर्माण जैसी प्रजनन प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पर्याप्त जिंक होने से फलधारण (Fruit set) अच्छा होता है और फल गिरने की समस्या कम होती है।
मुख्य, द्वितीयक और सूक्ष्म पोषक तत्वों की भूमिका
ये सभी पोषक तत्व पौधे के लिए भोजन की तरह हैं, और हर एक की अपनी विशिष्ट और अपूरणीय भूमिका है।
| पोषक तत्व वर्ग | मुख्य भूमिका |
| नाईट्रोजन (N) | पत्तियों एवं तने की वृद्धि (हरा भाग), प्रोटीन व क्लोरोफिल निर्माण। |
| फास्फोरस (P) | ऊर्जा हस्तांतरण (ATP), जड़ विकास, फूल एवं फल निर्माण। |
| पोटैशियम (K) | एंजाइम सक्रियण, जल संतुलन, फलों का आकार, रंग, गुणवत्ता एवं मिठास। |
| कैल्शियम (Ca) | कोशिका भित्ति का निर्माण एवं स्थायित्व, जड़ों की वृद्धि। |
| मैग्नीशियम (Mg) | क्लोरोफिल का केंद्रीय अणु (प्रकाश संश्लेषण के लिए)। |
| सल्फर (S) | अमीनो ऐसिड व विटामिन निर्माण, फलों की सुगंध एवं स्वाद। |
| आयरन (Fe) | क्लोरोफिल निर्माण एवं एंजाइम सक्रियण। |
| मैंगनीज (Mn) | प्रकाश संश्लेषण, एंजाइम सक्रियण। |
| कौपर (Cu) | प्रजनन प्रक्रिया, एंजाईम सक्रियण। |
| बोरान (B) | पराग नलिका वृद्धि, फल धारण, शर्करा का स्थानांतरण। |
स्प्रे:
- बायो 20: 2 मिली प्रती लीटर पानी
- किंगफोल जिंक 70: 0.5 मिली याने आधा मिली प्रती लीटर पानी
जमीन से:
- अल्बर्ट सोल्युशन : 4 किलो प्रती एकड़ (सभी 12 पोषकतत्व एक ही उत्पाद में)



