तरबूज की सेटिंग अवस्था (जब फूल से फल बन रहा हो) सबसे क्रिटिकल समय है। इस दौरान कैल्शियम, फास्फोरस, पोटाश और सूक्ष्मपोषकतत्वों का सही तालमेल न केवल फल को गिरने से रोकता है, बल्कि फल के शुरुआती साईज को भी ‘बूस्ट’ करता है।
1. फास्फोरस – फूल से फल बनने की प्रक्रिया में पौधे को अत्याधिक ऊर्जा (ATP के रूप में) चाहिए। फास्फोरस इस ऊर्जा का पावरहाउस है। यह सुनिश्चित करता है कि फल सैट होते समय पीला होकर गिरे नहीं। इसके लिए कम नाईट्रोजनयुक्त खाद जिसमे फास्फोरस है जैसे की लिबीग देना फायदेमंद है।
2. कैल्शियम- कैल्शियम कोशिका विभाजन (Cell Division) का आधार है। फल की बाहरी दीवार कितनी मजबूत होगी, यह कैल्शियम तय करता है। यह फल को सुंदर आकार देता है और भविष्य में फल के फटने (Cracking) की समस्या को खत्म करता है। इसके लिए जमीन से फास्फोरसयुक्त खाद दिए जाते है तो स्प्रे से कैलमैक्स गोल्ड दे। यह कोशिकाओं को जोड़नेवाले कैल्शियम पेक्टेट का निर्माण करता है । इससे फूल नहीं गिरते और सेटिंग अच्छी मिलती है ।
3. पोटाश – पोटाश पत्तों में बननेवाले भोजन (कार्बोहाईड्रेट) को खींचकर छोटे फल तक पहुँचाता है। यह फल के ‘सेल’ के अंदर पानी के दबाव को बनाए रखता है, जिससे फल का साईज तेजी से बढ़ता है और उसमें चमक आती है। इसके लिए कम नाईट्रोजनयुक्त खाद जिसमे पोटाश है जैसे की लिबीग देना फायदेमंद है और 13:00:45 दे (सेटिंग के तुरंत बाद)।
4. सूक्ष्म या अन्य पोषकतत्व (Micronutrients) –
सैटिंग अवस्था में इनकी भी भूमिका महत्वपूर्ण है।
• बोरान: यह कैल्शियम का साथी है। बोरान के बिना परागण अधूरा रहता है और फल टेढ़े-मेढ़े हो जाते हैं।
• जिंक: यह प्राकृतिक हार्मोन (औक्सिन) बनाता है, जो फल की लंबाई और चौड़ाई बढ़ाने में मदद करता है।
• मैग्नीशियम: पत्तों को हरा रखता है ताकि फल को पालने के लिए पर्याप्त भोजन बनता रहे।
स्प्रे:
• कैलमैक्स गोल्ड – 2 मिली प्रती लिटर पानी
• डीपी 98 – 2 मिली प्रती लिटर पानी
जमीन से:
• लिबीग 4 किलो प्रती एकड़
(नाईट्रोजन (यूरिया) का प्रयोग कम करें: इस समय ज्यादा नाईट्रोजन देने से बेल “हरी ” होकर शीघ्र वृद्धी दिखाएगी और छोटे फल गिर जाएंगे। सारा ध्यान P, K, Ca और B इन पोषकतत्वों के ऊपर पर रखें।)




